Monday, 12 October 2015

मेरी असफलता ही मेरी सफलता है ।

मेरी असफलता ही मेरी सफलता है ।

मैं असफल हूँ क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलता ।

मैं असफल हूँ क्योंकि मैं धोखा नहीं देता ।

मैं असफल हूँ क्योंकि मैं दिखावा नहीं करता ।

मैं असफल हूँ क्योंकि मैं चोरी नहीं करता ।

मैं असफल हूँ क्योंकि चुगलखोरी नहीं करता ।

मेरी असफलता ही मेरी सफलता है ।

मैं असफल हूँ क्योंकि मैं रिश्वतखोर नहीं हूँ ।

मैं असफल हूँ क्योंकि मैं मुँहचोर नहीं हूँ ।

मैं असफल हूँ क्योंकि मैं अमीर नहीं हूं ।

मैं असफल हूँ क्योंकि मैं नेता या फ़क़ीर नहीं हूँ ।

मेरी असफलता ही मेरी सफलता है ।

🌷🌷भास्कर पाठक🌹🌹

Tuesday, 6 October 2015

राष्ट्र का पिता नहीं पुत्र होता है ।

इस राष्ट्र में जन्मा कोई भी व्यक्ति राष्ट्र का पुत्र ही हो सकता है, पिता नहीं ।

"माता भूमि: पुत्रो अहं पृथिव्या"
-
अथर्ववेद इस भूमि को माँ और सभी को इसका पुत्र कहा, स्वयं प्रभु श्रीराम ने इस जन्मभूमि को जननी और स्वयं को इसका पुत्र कहा ।
-
मोहनदास करमचंद वेदों से और राम से बड़े नहीं हैं,,, वे राष्ट्र के पुत्र हो सकते है, राष्ट्रपिता नहीं.......

Friday, 2 October 2015

जात-पात, भेद-भाव

सब्जी खरीदते समय जाति नहीं देखी जाती
मगर उसी सब्जी को खिलाते समय जाति देखी जाती हैं।।
फसल कटाई पर जाति नहीं देखते
मगर उसकी बनी रोटिया खिलाते समय जाति देखी जाती हैं।।
मकान बनबाने के लिए जाति नहीं देखते
मगर जब मकान बन जाये तो उसमे बैठाने केलिए जाति देखते हैं।।
मंदिर बनबाने के लिए जाति नहीं देखते
मगर उसमे जाने के लिए जाति देखते हैं।।
स्कूल या कॉलेज बनबाने के लिए जाति नहीं देखते
लेकिन पढ़ाई के वक़्त जाति देखि जाती
हैं।।
कपडे खरीदते समय जाति नहीं देखते मगर उन्ही कपड़ो को पहनकर उनसे दूर भागते हैं ।

भेद भाव जात पात की सामाजिक मानसिकता से जब तक बाहर नही निकलेंगे तब तक देश का सम्पूर्ण विकास नहीं होगा ।